21 January, 2016

साँस तो ले लो

मन करता है कहीं छुप जाऊँ - 
अम्मा के पल्लू के नीचे 
उनके पेट की ठंडक पे 
सेहलालूँ थोड़ी देर 
अपने मन के सलवटों को। 

और धीरे से वो
मेरे माथे को सहलातीं - 
"बस, बस, रुक जाओ,
कहाँ भागी जा रही हो?
साँस तो ले लो। 

मैं सांस लेती हूँ - लम्बी -  
और कुछ देर ही सही,
मेरे चिन्ताओं के गाँठ
उधड़ते दीखते हैं
उनके हाथों में 
मानो ऊन के गोले।  

3 comments:

  1. Doesn't matter if you write in English or Hindi, the voice is always the same.

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    1. Putting this out took a lot out of me. I'm glad the voice sounds familiar.

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  2. this brought me a smile

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